हर साल, फैक्ट्रियों, गाड़ियों और डेटा सेंटरों से भारी मात्रा में गर्मी बेकार चली जाती है। अगर इस अपशिष्ट ऊष्मा को बिजली में बदला जा सके तो ऊर्जा संकट में बड़ी मदद मिल सकती है। अब, क्योटो यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खोज की है जो इस सपने को हकीकत बना सकती है।
क्योटो यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर सुन यीफान और प्रोफेसर केन कुरोसाकी के नेतृत्व में एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक दल ने एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का इस्तेमाल करके थर्मोइलेक्ट्रिक सामग्री (ताप-विद्युत सामग्री) के लिए एक “सुनहरा अनुपात” खोजा है। ये वो खास तरह की सामग्रियां हैं जो गर्मी को सीधे बिजली में बदल सकती हैं।
गर्मी को बिजली में बदलने वाली सामग्री: एक बड़ी चुनौती
थर्मोइलेक्ट्रिक सामग्री ऊर्जा बचाने के लिए बेहद ज़रूरी हैं क्योंकि ये गर्मी को सीधे इलेक्ट्रिसिटी में बदल देती हैं। ये एक अनोखी क्षमता है जिससे बेकार जा रही ऊर्जा को दोबारा इस्तेमाल में लाया जा सकता है। लेकिन अब तक, अच्छी प्रदर्शन वाली सामग्री ढूंढना बहुत मुश्किल था। इसके लिए वैज्ञानिकों को अनगिनत कोशिशें करनी पड़ती थीं और बहुत सारे प्रयोग करने पड़ते थे, जो समय और संसाधनों दोनों की बर्बादी थी।
एआई ने सुलझाई 30 साल पुरानी पहेली
इस नए शोध में वैज्ञानिकों ने लगभग 70,000 प्रायोगिक डेटा को एआई को सिखाया। एआई ने इन विशाल डेटासेट का विश्लेषण किया और एक चौंकाने वाला पैटर्न पाया: उच्च प्रदर्शन वाली थर्मोइलेक्ट्रिक सामग्री में, गर्मी का लगभग 50% परमाणुओं के कंपन (जिन्हें फोनन कहते हैं) द्वारा और शेष 50% बिजली ले जाने वाले कणों (जिन्हें इलेक्ट्रॉन कहते हैं) द्वारा ले जाया जाता है।
यह “50-50” का अनुपात ही उच्च प्रदर्शन का संकेत है। वैज्ञानिकों ने इसे 30 साल पुराने “फोनन-ग्लास इलेक्ट्रॉन-क्रिस्टल” (Phonon-Glass Electron-Crystal) डिज़ाइन सिद्धांत को डेटा के माध्यम से पहली बार सही ढंग से साबित किया है। इस सिद्धांत के अनुसार, एक अच्छी थर्मोइलेक्ट्रिक सामग्री ऐसी होनी चाहिए जो गर्मी को ठीक से न फैलाए (जैसे ग्लास गर्मी को रोकता है) लेकिन बिजली को बहुत अच्छे से फैलाए (जैसे क्रिस्टल बिजली को फैलाता है)। इस खोज ने इस पुराने सिद्धांत को एक ठोस, मापने योग्य आधार दिया है।

भविष्य के लिए एक नई राह
वैज्ञानिकों ने इस “50-50” अनुपात और ताप-चालकता (heat conductivity) की भविष्यवाणी करने वाले मशीन लर्निंग मॉडल को लगभग 1 लाख अलग-अलग यौगिकों पर लागू किया। इस प्रक्रिया से उन्होंने 2,522 संभावित सामग्रियों की पहचान की जो गर्मी को ठीक से नहीं फैलने देतीं। इस खोज से वैज्ञानिकों को यह पता चला है कि बेहतर प्रदर्शन के लिए किन तत्वों का चुनाव करना चाहिए, जिससे सामग्री विकास की प्रक्रिया में लगने वाले समय और लागत में भारी कमी आएगी।
यह सफलता सामग्री विकास के क्षेत्र में एक बड़ा कदम है। इससे भविष्य में ऐसी सामग्रियों को खुद-ब-खुद (autonomous) विकसित करने में मदद मिलेगी, जिससे ऊर्जा दक्षता में क्रांतिकारी बदलाव आ सकते हैं और हम बेकार जा रही गर्मी को एक उपयोगी ऊर्जा स्रोत में बदल सकते हैं।
वैज्ञानिक का बयान
क्योटो यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर सुन यीफान ने इस खोज पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा, “जब मैंने लगभग 70,000 डेटा बिंदुओं को एक ही ग्राफ पर प्लॉट किया, तो एक आश्चर्यजनक रूप से सरल और सुंदर पैटर्न सामने आया। हर एक बिंदु दुनिया भर के वैज्ञानिकों द्वारा जमा किए गए प्रयोगों का रिकॉर्ड था। यह वह पल था जब मुझे विशाल डेटा से जानकारी निकालने के डेटा विश्लेषण का आकर्षण फिर से महसूस हुआ। मैं एआई के साथ डेटा की खोज जारी रखने, पूर्वजों द्वारा छोड़े गए ज्ञान को उजागर करने और इसे नई सामग्री के विकास से जोड़ने का इरादा रखता हूं।”




