वैज्ञानिकों ने जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (James Webb Space Telescope) का उपयोग करके अब तक के सबसे दूर के सुपरनोवा की खोज की है। यह सुपरनोवा, जिसका नाम GRB 250314A है, लगभग 7.3 रेडशिफ्ट पर स्थित है, जो इसे अब तक देखे गए सुपरनोवा में सबसे दूर बनाता है।
यह खोज तारों के विकास को समझने में मददगार हो सकती है। शोधकर्ताओं के अनुसार, ज्यादातर गामा-रे विस्फोट (gamma-ray bursts/GRBs) विशाल तारों के गिरने से होते हैं। इससे ये विस्फोट ब्रह्मांड में तारों के निर्माण की प्रक्रिया को समझने के लिए महत्वपूर्ण उपकरण बन जाते हैं। GRB की घटनाओं के बाद सुपरनोवा की मौजूदगी से यह पता चलता है कि किस तरह तारे खत्म होते हैं।
इस खोज का महत्व क्या है? यह खोज वैज्ञानिकों को शुरुआती ब्रह्मांड में व्यक्तिगत तारों का अध्ययन करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करती है। पहले, दूर के तारों का अध्ययन करना बहुत मुश्किल था क्योंकि वे बहुत धुंधले होते हैं। जेम्स वेब टेलीस्कोप की शक्तिशाली क्षमता के कारण, अब वैज्ञानिकों के लिए यह संभव हो गया है कि वे इन तारों का अधिक विस्तार से अध्ययन कर सकें।
यह सुपरनोवा GRB 250314A नामक गामा-रे विस्फोट के बाद पाया गया। स्पेस-आधारित मल्टी-बैंड एस्ट्रोनॉमिकल वेरिएबल ऑब्जेक्ट्स मॉनिटर (Space-based multi-band Astronomical Variable Objects Monitor/SVOM) ने इस विस्फोट का पता लगाया था। बाद में, जेम्स वेब टेलीस्कोप ने इस क्षेत्र का निरीक्षण किया और सुपरनोवा की खोज की।
शोधकर्ताओं ने JWST/NIRCAM के अवलोकनों के आधार पर मेजबान आकाशगंगा और संभावित सुपरनोवा दोनों का पता लगाया। उन्होंने पाया कि सुपरनोवा की चमक SN 1998bw के समान है, जो एक प्रसिद्ध GRB सुपरनोवा है। नीले आफ्टरग्लो रंगों के आधार पर कम धूल विलुप्ति के प्रमाण को देखते हुए, SN 1998bw से अधिक चमकदार सुपरनोवा को बाहर रखा जा सकता है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि इस सुपरनोवा का अध्ययन करके, वे शुरुआती ब्रह्मांड में तारों के गुणों के बारे में अधिक जान सकते हैं। क्या शुरुआती ब्रह्मांड के तारे आज के तारों से अलग थे? क्या वे अधिक विशाल थे? क्या उनके जीवनकाल अलग थे? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब वैज्ञानिक इस खोज के माध्यम से खोजने की उम्मीद कर रहे हैं।
वैज्ञानिकों ने इस खोज के लिए JWST के NIRCAM उपकरण का उपयोग किया। NIRCAM एक शक्तिशाली कैमरा है जो अवरक्त प्रकाश (infrared light) को देख सकता है। अवरक्त प्रकाश धूल और गैस के बादलों से गुजर सकता है, जिससे वैज्ञानिकों को उन वस्तुओं को देखने की अनुमति मिलती है जो अन्यथा दिखाई नहीं देंगी।
इस शोध से पता चलता है कि GRB 250314A को बनाने वाला तारा बहुत अधिक विशाल नहीं था। संभवतः यह स्थानीय ब्रह्मांड के GRB पूर्वजों जैसा दिखता था।
आगे क्या होगा? वैज्ञानिक इस सुपरनोवा और इसके मेजबान आकाशगंगा का अध्ययन करना जारी रखेंगे। वे अन्य दूर के सुपरनोवा की भी तलाश करेंगे। इन अध्ययनों से वैज्ञानिकों को शुरुआती ब्रह्मांड में तारों के बारे में हमारी समझ को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
क्या यह खोज ब्रह्मांड के रहस्यों को उजागर करने में हमारी मदद कर सकती है? केवल समय ही बताएगा।
स्रोत: UCD डबलिन रिसर्च




