वैज्ञानिकों को अल्जाइमर रोग (Alzheimer’s disease) के रहस्य सुलझाने में एक बड़ी सफलता मिली है! उन्होंने डीएनए (DNA) के उन हिस्सों में सुराग खोजे हैं जिन्हें पहले बेकार या “जंक” माना जाता था। यह खोज अल्जाइमर के इलाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
यह खोज दर्शाती है कि हमारी सोच से कहीं ज़्यादा, डीएनए का हर हिस्सा महत्वपूर्ण हो सकता है। पहले वैज्ञानिक मानते थे कि डीएनए का एक बड़ा भाग कोई काम नहीं करता। लेकिन अब पता चल रहा है कि यह “जंक डीएनए” अल्जाइमर जैसे रोगों में भी भूमिका निभा सकता है।
यह शोध “नेचर न्यूरोसाइंस” नामक जर्नल में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने मानव मस्तिष्क की कोशिकाओं (कोशिकाओं) में मौजूद “एस्ट्रोसाइट्स” नामक तारों के आकार की कोशिकाओं का अध्ययन किया। एस्ट्रोसाइट्स मस्तिष्क में सबसे आम प्रकार की सहायक कोशिकाएं हैं। ये न्यूरॉन्स (neurons) को सही ढंग से काम करने में मदद करती हैं।
शोधकर्ताओं ने पाया कि अल्जाइमर से पीड़ित लोगों में एस्ट्रोसाइट्स के भीतर कुछ जीन (gene) ठीक से काम नहीं कर रहे थे। उन्होंने यह भी पता लगाया कि डीएनए के दूर के हिस्से, जिन्हें “डिस्टल एन्हांसर” (distal enhancers) कहा जाता है, इन जीनों को नियंत्रित करते हैं।
डिस्टल एन्हांसर जीन से बहुत दूर स्थित डीएनए के खंड होते हैं। ये जीन के काम को बढ़ाने या कम करने में मदद करते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि अल्जाइमर रोग में ये डिस्टल एन्हांसर ठीक से काम नहीं कर रहे थे, जिसके कारण एस्ट्रोसाइट्स में कुछ जीन खराब हो रहे थे।
यह खोज बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अल्जाइमर रोग के नए इलाज के लिए रास्ते खोल सकती है। यदि वैज्ञानिक डिस्टल एन्हांसर को ठीक से काम करने का तरीका ढूंढ लेते हैं, तो वे संभवतः एस्ट्रोसाइट्स में जीनों को सामान्य रूप से काम करने में मदद कर सकते हैं। इससे अल्जाइमर रोग के लक्षणों को कम करने या रोकने में मदद मिल सकती है।
इस शोध का नेतृत्व करने वालीं डॉ. इरीना वोइनएगु ने एक न्यूज़ रिलीज़ में कहा कि यह खोज “एक महत्वपूर्ण खोज है क्योंकि यह हमें अल्जाइमर रोग के बारे में एक नया दृष्टिकोण देती है।” उनका मानना है कि “यह हमारे मस्तिष्क में जीनों को नियंत्रित करने वाले जटिल तंत्र को समझने में हमारी मदद करेगा।”
शोधकर्ताओं ने इस खोज को करने के लिए एक नई तकनीक का इस्तेमाल किया जिसे “क्रिस्परआई स्क्रीनिंग” (CRISPRi screening) कहा जाता है। इस तकनीक का उपयोग करके, वैज्ञानिक डीएनए के विशिष्ट हिस्सों को बंद कर सकते हैं और देख सकते हैं कि इसका कोशिकाओं पर क्या प्रभाव पड़ता है। उन्होंने इस तकनीक का उपयोग एस्ट्रोसाइट्स में लगभग 1,000 डिस्टल एन्हांसर को बंद करने के लिए किया और फिर देखा कि इससे कौन से जीन प्रभावित होते हैं।
इस शोध से पता चला कि 100 से ज़्यादा नियामक क्रियाएँ हैं। यानी डीएनए के खंड जो जीन को प्रभावित करते हैं। यह भी पता चला कि ये खंड एल्जाइमर रोग में शामिल मुख्य एस्ट्रोसाइट कार्यों और जीनों को नियंत्रित करते हैं।
अध्ययन में एक “ईजीआरएफ” नामक एक मॉडल का भी इस्तेमाल किया गया। यह मॉडल एन्हांसर गतिविधि की भविष्यवाणी करता है। इस मॉडल ने मौजूदा मॉडलों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया।
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह खोज अल्जाइमर रोग के अलावा अन्य मस्तिष्क रोगों को समझने में भी मदद कर सकती है। उनका मानना है कि डिस्टल एन्हांसर मस्तिष्क के विकास और कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, और उनके काम में गड़बड़ी होने से कई रोग हो सकते हैं।
यह भी उल्लेखनीय है कि इस शोध में मानव मस्तिष्क की वास्तविक कोशिकाओं का उपयोग किया गया था। पहले के कई अध्ययनों में जानवरों या कृत्रिम कोशिकाओं का उपयोग किया गया था। इससे इस खोज को और भी अधिक महत्वपूर्ण और प्रासंगिक बना दिया है।
यह शोध अल्जाइमर रोग के क्षेत्र में एक रोमांचक विकास है। यह रोग के नए इलाज के लिए रास्ते खोल सकता है और हमें मस्तिष्क के बारे में और अधिक जानने में मदद कर सकता है। भविष्य में, वैज्ञानिक यह पता लगाने की उम्मीद करते हैं कि डिस्टल एन्हांसर को ठीक से काम करने का तरीका कैसे खोजा जाए और क्या इससे अल्जाइमर रोग के लक्षणों को कम किया जा सकता है।




