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क्या कोविड वैक्सीन अब ‘दवा’ का काम भी करेगी?

विज्ञान की दुनिया में अब तक टीकों (vaccines) की भूमिका एक ‘सुरक्षा कवच’ जैसी रही है। हम टीका इसलिए लगवाते हैं ताकि बीमारी हमारे शरीर में प्रवेश ही न कर सके या यदि करे, तो उसका प्रभाव घातक न हो। लेकिन, क्या हो अगर वही टीका बीमारी होने के बाद एक ‘दवा’ या उपचार की तरह काम करने लगे? सुनने में यह किसी विज्ञान कथा जैसा लग सकता है, लेकिन अमेरिका की ट्यूलेन यूनिवर्सिटी (Tulane University) के शोधकर्ताओं ने इसे हकीकत के करीब ला खड़ा किया है।

हाल ही में प्रतिष्ठित जर्नल ‘नेचर कम्युनिकेशन्स’ (Nature Communications) में प्रकाशित एक अध्ययन ने चिकित्सा जगत में हलचल मचा दी है। ट्यूलेन नेशनल प्राइमेट रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिकों ने पाया है कि संक्रमण के बाद भी यदि कोविड-19 वैक्सीन दी जाए, तो यह ‘लॉन्ग कोविड’ (Long COVID) से जुड़ी गंभीर चयापचय (metabolic) समस्याओं, विशेषकर अनियंत्रित ब्लड शुगर को ठीक करने में मदद कर सकती है।

लॉन्ग कोविड और हाई ब्लड शुगर: एक छिपा हुआ संकट

कोरोना महामारी का तीव्र दौर भले ही बीत चुका हो, लेकिन इसके पीछे छूटे निशान, जिसे हम ‘लॉन्ग कोविड’ कहते हैं, आज भी लाखों लोगों के लिए पहेली बने हुए हैं। इनमें सबसे चिंताजनक है—हाइपरग्लाइसेमिया (Hyperglycemia) यानी हाई ब्लड शुगर। कई ऐसे मरीज, जिन्हें पहले कभी डायबिटीज नहीं थी, कोविड से उबरने के बाद अचानक ब्लड शुगर बढ़ने की समस्या से जूझ रहे हैं। यह स्थिति न केवल शरीर को कमजोर करती है, बल्कि हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकती है।

इसी समस्या की तह तक जाने के लिए शोधकर्ताओं ने प्राइमेट्स (बंदरों की प्रजाति, जिनका शरीर क्रिया विज्ञान इंसानों के बेहद करीब होता है) पर अध्ययन किया। उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि वायरस शरीर से चले जाने के बाद भी शुगर का स्तर बढ़ा हुआ क्यों रहता है।

अध्ययन का चौंकाने वाला परिणाम

इस शोध का सबसे रोमांचक पहलू वह प्रयोग था, जिसमें वैक्सीन का उपयोग ‘निवारक’ (preventive) के बजाय ‘उपचारात्मक’ (therapeutic) रूप में किया गया। वैज्ञानिकों ने संक्रमण होने के 4 दिन बाद एमआरएनए (mRNA) वैक्सीन की खुराक दी। परिणाम बेहद सकारात्मक रहे। जिन विषयों को संक्रमण के बाद वैक्सीन दी गई, उनके ब्लड शुगर के स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखा गया और यह प्रभाव लंबे समय तक बना रहा।

यह खोज इस बात का प्रमाण है कि वैक्सीन केवल एंटीबॉडी बनाने की मशीन नहीं है, बल्कि यह शरीर की बिगड़ी हुई मेटाबॉलिक व्यवस्था को पटरी पर लाने में भी सक्षम हो सकती है।

क्यों बढ़ती है शुगर? शरीर के भीतर की कहानी

अक्सर यह माना जाता है कि वायरस सीधे पैंक्रियाज (अग्न्याशय) पर हमला करता है, जिससे इंसुलिन का बनना प्रभावित होता है। लेकिन इस शोध ने एक नया दृष्टिकोण सामने रखा है। शोधकर्ताओं ने पाया कि वायरस शरीर से तो खत्म हो चुका था—लिवर और पैंक्रियाज में उसका कोई नामोनिशान नहीं था—लेकिन उसने पीछे ‘सूजन’ (inflammation) के कुछ ऐसे अणु छोड़ दिए थे, जो लिवर की कार्यप्रणाली को बाधित कर रहे थे।

लिवर हमारे शरीर में ग्लूकोज (शुगर) को स्टोर करने का काम करता है। संक्रमण के कारण उत्पन्न सूजन ने लिवर की इस क्षमता को बदल दिया, जिससे खून में शुगर का स्तर अनियंत्रित हो गया। वैक्सीन ने संभवतः इस सूजन (inflammation) को कम करके शरीर को दोबारा संतुलन में आने में मदद की।

विशेषज्ञों का क्या कहना है?

इस अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ. क्लोविस पामर (Clovis Palmer) इसे एक बड़ी उपलब्धि मानते हैं। उन्होंने कहा, “यह शोध कोविड-19 के खिलाफ हमारी लड़ाई में एक नया आयाम खोलता है। यह दिखाकर कि संक्रमण के बाद भी वैक्सीन के चिकित्सीय लाभ हो सकते हैं, हम लॉन्ग कोविड से पीड़ित लोगों, विशेषकर उन लोगों की मदद के लिए नई रणनीतियां बना सकते हैं जो थकान और मेटाबॉलिक गड़बड़ी से जूझ रहे हैं।”

वहीं, ट्यूलेन नेशनल प्राइमेट रिसर्च सेंटर के निदेशक और सह-लेखक डॉ. जे रैपापोर्ट (Jay Rappaport) का मानना है कि यह खोज डायबिटीज और वायरल संक्रमण के संबंध को समझने में मील का पत्थर साबित होगी। उनका कहना है, “कोविड एक जानवर मॉडल में डायबिटीज उत्पन्न कर सकता है, यह खोज अपने आप में महत्वपूर्ण है। संक्रमण के बाद दिया गया टीका सुरक्षात्मक प्रभाव डाल सकता है, यह तथ्य महामारी की चल रही चुनौतियों से निपटने के लिए नवीन शोध के महत्व को रेखांकित करता है।”

भविष्य की राह

यह शोध विशेष रूप से भारत जैसे देशों के लिए अत्यंत प्रासंगिक है, जहाँ डायबिटीज के मरीजों की संख्या पहले से ही बहुत अधिक है। यदि भविष्य में वैक्सीन आधारित उपचार को इंसानों के लिए सुरक्षित और प्रभावी पाया जाता है, तो यह उन लाखों लोगों के लिए वरदान साबित हो सकता है जो वायरस से तो जीत गए, लेकिन उसके दुष्प्रभावों से अब भी लड़ रहे हैं।

फिलहाल, विज्ञान ने एक उम्मीद की किरण दिखाई है—कि कभी-कभी सुरक्षा कवच भी मरहम का काम कर सकता है।